योग दर्शन

 बौद्ध सम्प्रदाय में योग साधना

 बौद्ध सम्प्रदाय में योग

 बौद्ध सम्प्रदाय में योग साधना:-  
 भगवान बुद्ध ने साधना मार्ग का प्रवर्तन करते समय सर्वप्रथम चार आर्य सत्य 
का आदेश किया जिसका ज्ञान होना प्रत्येक साधकों के लिए साधना के पूर्व बौद्ध 
धर्म में आवश्यक माना जाता गया है। यह चार आर्य सत्य इस प्रकार हैं- 
 (1) प्रथम आर्यसत्य-दुःख:-   
 भगवान बुद्ध कहते हैं- जन्म लेना, बूढ़ा होना, मृत्यु  होना शौक करना, 
रोना-पीटना, पीडि़त होना, चिन्ता करना, परेशान होना, इच्छित वस्तु की प्राप्ति न 
होना दुःख है। पाँचों उपादान-रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार और विज्ञान दुःख है।  

बौद्ध-दर्शन में योग 

बौद्ध-दर्शन  में योग 

  बौद्ध-दर्शन और योग 
 उपनिषदों ने बैदिक कर्मकाण्ड में आयी जटिलता एवं विकृतियाँ की निन्
 और आध्यात्मिक अनुभव को ही परम् पुरूषार्थ घोषित कर साधारण जन-मा
नयी धार्मिक क्रान्ति पैदा की उसी क्रान्ति को कालान्तर में महावीर और गा
 ने विस्तृत रूप देकर नयी धार्मिक चेतना का विकास किया। डा0 राधा कृष्ण
सार-‘‘बुद्ध ने उपनिषदों के दार्शनिक सिद्धान्तों को जो इस समय कुछ थोड
 हुए लोगों तक ही सीमित थे, जनसाधारण में प्र ्रचारित करने में सहायता दी 
धर्म का उद्देश्य यह था कि उपनिषदों के आदर्शवाद को उसके उत्कृष्ट रूप

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