सिद्ध चिकित्सा

सिद्ध चिकित्सा विज्ञान क्या हैं

           सिद्ध चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार का लम्बा और विविध इतिहास है। परम्परा के अनुसार यह द्रविड़ संस्कृति द्वारा विकसित सबसे पुरानी परम्परागत उपचार विधि है। ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियों में बताया गया है कि भगवान शिव ने सबसे पहले अपनी पत्नी पार्वती को इसके बारे में बताया था। पार्वती ने यह ज्ञान अपने पुत्र मुरुग को दिया। उसने यह सारा ज्ञान अपने प्रमुख शिष्य अगस्त्य को दिया। अगस्त्य ऋषि ने 18 सिद्धों को इसके बारे में बताया और उन्होंने इस ज्ञान का लोगों में प्रचार किया।

सिद्ध चिकित्सा

सिद्ध चिकित्सा काफी हद तक आयुर्वेद के समान है। इस पद्धति में रसायन का आयुर्विज्ञान तथा आल्‍केमी (रसायन विश्‍व) के सहायक विज्ञान के रूप में काफी विकास हुआ है। इसे औषध-निर्माण तथा मूल धातुओं के सोने में अंतरण में सहायक पाया गया। इसमें पौधों और खनिजों की काफी अधिक जानकारी थी और वे विज्ञान की लगभग सभी शाखाओं की जानकारी रखते थे। सिद्ध चिकित्सा प्रणाली के सिद्धांत और शिक्षा मौलिक और व्‍यावहारिक दोनों हैं। यह आयुर्वेद के समान ही है इसकी विशेषता आंतरिक रसायन है। इस प्रणाली के अनुसार मानव शरीर ब्रह्माण्‍ड की प्रतिकृति है (यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे) और इसी प्रकार से भोजन और औषधि भी, चाहे उनका उद्भव