योग दर्शन

कुंडलिनी जागरण और अनुभव

कुंडलिनी जागरण और अनुभव

कुंडलिनी शक्ति भारतीय सभ्यता और दर्शन में एक जाना पहचाना नाम है |हर साधक इसका सपना देखता है |इसे जानना चाहता है |इसे करना चाहता है |इसका कारण है की यह अथाह शक्तियों का स्वामी शक्ति है जो हर मनुष्य में विद्यमान होने पर भी करोड़ों में किसी एक को मिलती है | अब तो बहुत से लोग कहने लगे हैं कि मेरी कुंडलिनी जाग्रत है,|े कुंडलिनी बच्चों का खेल हो गई | लेकिन क्या यह सच है?

स्वामी रामदेव जी के सात प्राणायाम

स्वामी रामदेव  जी  के सात प्राणायाम

~यो+ग ~ के आठ अंगों में से चौथा अंग है प्राणायाम। प्राण+आयाम से प्राणायाम शब्द बनता है। प्राण का अर्थ जीवात्मा माना जाता है । आयाम के दो अर्थ है- प्रथम नियंत्रण या रोकना, द्वितीय विस्तार । हम जब साँस लेते हैं तो भीतर जा रही हवा या वायु पाँच भागों में विभक्त हो जाती है या कहें कि वह शरीर के भीतर पाँच जगह स्थिर हो जाता हैं।

ये पंचक निम्न हैं-

(1) व्यान, (2 )समान, (3) अपान, (4) उदान और (5) प्राण।

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