चक्र और उनका शरीर पर प्रभाव

चक्र

१. मूलाधार चक्र :

यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह आधार चक्र है। ९९.९% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है, उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।

मंत्र : लं

कैसे जाग्रत करें : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है.! इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।

कैबिनेट में पास होगी योग चिकित्सा नियमावली

जिम की एक्सर्साइज़ से बेहतर है योग

आयुष राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में जल्द हीयोग को एक चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने के लिए योग प्राकृतिक चिकित्सा नियामावली भी बनाई जा रही है। इसके लिए कमिटी का गठन कर दिया गया है। कमिटी जब अपनी रिपोर्ट सौंपेगी तो उसे कैबिनेट में पास कर लागू कर दिया जाएगा। धर्म सिंह सैनी एलयू के मालवीय सभागार में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में बोल रहे थे। 

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